दीपावली, या कहें हमारा प्यारा दीपोत्सव, वो दिन है जब पूरा भारत जगमगाने लगता है। हर तरफ़ दीयों की रौशनी, मिठाइयों की खुशबू और दिलों में उमंग होती है। लोग कहते हैं कि ये सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि एक एहसास है — अंधकार पर प्रकाश की, बुराई पर अच्छाई की, और नफ़रत पर प्यार की जीत का प्रतीक।
हर साल की तरह 2025 में भी दीपावली ज़ोर-शोर से मनाई जाएगी। लेकिन इस बार थोड़ा रुक कर सोचे — क्या हम इस त्योहार को और बेहतर तरीके से नहीं मना सकते? मतलब खुशियाँ भी बरक़रार रहें और सुरक्षा भी।
दीपावली का असली मतलब क्या है?
कहते हैं जब भगवान श्रीराम चौदह साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, तब पूरे नगर ने दीये जलाए थे। उसी ख़ुशी में दीपावली की परंपरा शुरू हुई। आज भी लोग अपने घरों की पूरी सफ़ाई करते हैं, रंगोली बनाते हैं, दरवाज़ों पर तोरण लगाते हैं और माँ लक्ष्मी व गणेश जी की पूजा करते हैं।
माना जाता है कि माँ लक्ष्मी वहीं आती हैं जहाँ स्वच्छता और सकारात्मकता होती है, इसलिए सफाई का काम सिर्फ दिखावे के लिए नहीं बल्कि एक शुभ संकेत भी है।
दीपावली पर क्या करें (Do’s)-
- घर की सफाई और सजावट ज़रूर करें
दीपावली से पहले घर का हर कोना चमकाइए। टूटी या बेकार चीजें निकाल दीजिए। दरवाज़े पर सुंदर सी रंगोली बना दीजिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा अंदर आए। - माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा पूरे विधि-विधान से करें
शुभ मुहूर्त में पूजा करें, परिवार के साथ आरती करें और दीप प्रज्वलित करें। साथ में “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है। - पर्यावरण-हितैषी दीपावली मनाएँ
अगर हो सके तो पटाखे कम से कम जलाएँ। या फिर “ग्रीन पटाखों” का इस्तेमाल करें। असली मज़ा तो दीयों और रोशनियों में ही है। - बच्चों की सुरक्षा ध्यान में रखें
बच्चों को अकेले पटाखे नहीं जलाने दें। हमेशा उनके साथ रहें और ध्यान रखें कि वो सूती कपड़े पहनें। - अपनों के साथ समय बिताएँ
दीपावली सिर्फ दिखावे का नहीं, बल्कि दिल जोड़ने का त्योहार है। मिठाइयाँ बाँटिए, पुराने गिले-शिकवे मिटाइए और अपने घर में खुशियाँ बिखेरिए।

दीपावली पर क्या न करें (Dont’s) –
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पटाखे न जलाएँ
कई बार हड़बड़ी में हादसे हो जाते हैं। इसलिए खुले और सुरक्षित जगह का चुनाव करें। - सूखे पत्तों या कचरे के पास दीये या पटाखे न रखें
ऐसी जगहों पर आग फैल सकती है, थोड़ा ध्यान रखिए। - बहुत शोर और धुआँ करने वाले पटाखे न जलाएँ
ये बच्चों, बूढ़ों और पालतू जानवरों के लिए बिल्कुल ठीक नहीं। पर्यावरण को भी नुकसान होता है। - सिंथेटिक या ढीले कपड़े न पहनें
कॉटन के कपड़े पहनना सबसे सुरक्षित विकल्प है। - बिजली के सजावट वाले तारों को बिना निगरानी के चालू न छोड़ें
कई बार छोटे शॉर्ट-सर्किट भी बड़ी आग में बदल जाते हैं। उपयोग के बाद प्लग निकालना न भूलें।
दीपावली से जुड़ी सावधानियाँ
- पानी या रेत की बाल्टी पास रखें ताकि आपात स्थिति में काम आए।
- जलते पटाखे से दूरी बनाए रखें और एक बार जलाने के बाद झुककर न देखें।
- अगर किसी को जलन हो जाए तो तुरंत ठंडा पानी डालें और डॉक्टर को दिखाएँ।
- पालतू जानवरों को शांत और सुरक्षित जगह पर रखें — उन्हें तेज आवाज़ से डर लगता है।
- दीप जलाकर कभी घर से बाहर न जाएँ, हमेशा बुझाकर ही निकलें।
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पर्यावरण के नाम एक छोटा वादा
इस बार जब हम दीया जलाएँ, तो एक छोटा-सा संकल्प भी करें —
“हम रोशनी फैलाएँगे, धुआँ नहीं।”
क्योंकि असली दीपावली तो तब होती है जब हर चेहरा मुस्कुराता है, हर दिल में सच्ची खुशी होती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
दीपावली की असली चमक तब है जब हमारे सारे प्रियजन सुरक्षित हों, आस-पास का माहौल स्वच्छ हो और हर घर में सच्चा उजाला फैला हो।
तो आइए, इस दीपावली 2025 पर हम वादा करें —
खुशियाँ बाँटेंगे, सुरक्षा अपनाएँगे और पर्यावरण का भी ध्यान रखेंगे।
आप सभी को दीपावली 2025 की हार्दिक शुभकामनाएँ —
आपके जीवन में हर दिन दीपावली जैसी रौशनी छा जाए
