2025 का भी इंतज़ार हुआ ख़तम ,उत्साह लौट आया है—दुर्गा पूजा आ गई है, और हर जगह बंगाली लोग भक्ति, आनंद और एकजुटता के पांच दिनों का जश्न मनाने के लिए तैयार हैं। दिल्ली में भी जोश कुछ अलग नहीं है, यहाँ भी शहर के बंगाली और अन्य समुदायों का केंद्र, दिल्ली एक बार फिर माँ दुर्गा का खुले दिल और उत्साह के साथ स्वागत करने के लिए तैयार है।
पश्चिम बंगाल की संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा दुर्गा पूजा का यह त्योहार, सीआर पार्क पाँच मुख्य दुर्गा पूजा समारोहों का आयोजन करता है जो दिल्ली में रहने वाले बंगालियों को घर जैसा एहसास दिलाते हैं। लेकिन उत्सव का उत्साह सिर्फ़ एक ही क्षेत्र तक सीमित नहीं है – मिंटो रोड, कश्मीरी गेट काली बाड़ी, आरके आश्रम मार्ग के पास आराम बाग पूजा, और कई अन्य जगहें भी बड़ी ऊर्जा और भक्ति के साथ पूजा मनाती हैं।
दिल्ली के 6 दुर्गा पूजा पंडाल –
3. कोऑपरेटिव ग्राउंड दुर्गा पूजा
सीआर पार्क के के ब्लॉक में इस साल की दुर्गा पूजा कुछ खास होने वाली है। कोऑपरेटिव ग्राउंड दुर्गा पूजा समिति अपनी 50वीं वर्षगांठ मना रही है, और इस मौके पर पंडाल को एक अनोखे अंदाज़ में सजाया गया है।थीम प्रेरित है 12वीं सदी के शानदार जैसलमेर किले से, जिसकी सुनहरी झलक हर कोने में बसी होगी। लेकिन इतना ही नहीं—इस बार पंडाल में कहानी का एक और पन्ना जुड़ता है। यह श्रद्धांजलि है सत्यजीत रे की मशहूर बंगाली क्लासिक फिल्म सोनार केला को, जिसने जैसलमेर की रहस्यमयता और सांस्कृतिक विरासत को अमर बना दिया। यह विशेष संगम न सिर्फ स्थापत्य कला का अनुभव कराएगा बल्कि फिल्म और इतिहास के रंगों में रची-बसी एक यादगार यात्रा भी होगा।
2. बी ब्लाक दुर्गा पूजा
चित्तरंजन पार्क (सीआर पार्क) के बी ब्लॉक में स्थित दुर्गा पूजा, माँ शारदा पार्क में आयोजित एक जाना-माना सामुदायिक उत्सव है, जो इस साल देवी दुर्गा की 50वीं वर्षगाँठ मना रहा है। इसका शुभारंभ 27 सितंबर को रामकृष्ण मिशन के पूज्य महाराज द्वारा किया जाएगा। उसी दिन यहाँ पर आनंदमेला यानी पारंपरिक बंगाली व्यंजनों से भरा भोजन उत्सव भी आयोजित किया जाएगा, जो हर साल लोगों के बीच खासा लोकप्रिय रहता है। यह आयोजन 27 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा, और यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन नेहरू एन्क्लेव है।
3.मेला ग्राउंड दुर्गा पूजा
सीआर पार्क का मेला ग्राउंड पंडाल इस साल एक खास मौके पर है — यह अपनी 50वीं वर्षगांठ मना रहा है। पिछले 50 सालों से यह पंडाल दिल्ली में दुर्गा पूजा का सबसे बड़ा और सबसे मशहूर केंद्र रहा है।इस खास मौके पर आयोजकों ने एक बहुत ही सुंदर थीम चुनी है — महिषादल राजबाड़ी, जो पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले में है। ये पुराना महल अपनी खूबसूरत बनावट और इतिहास के लिए जाना जाता है।
पंडाल में इस राजबाड़ी की एकदम असली जैसी झलक देखने को मिलती है। बंगाली स्टाइल की खिड़कियाँ, नक्काशीदार सजावट, रंग-बिरंगा टेराकोटा काम — सब कुछ वैसा ही बनाया गया है जैसे असली महल में होता है। इसे तैयार करने में कारीगरों ने कई महीने मेहनत की है।
करीब 50 साल पहले कुछ लोगों ने मिलकर इसे एक छोटे आयोजन के रूप में शुरू किया था, और आज यह दिल्ली के सबसे बड़े और चर्चित पंडालों में गिना जाता है। हर साल हजारों लोग यहां मां दुर्गा के दर्शन के लिए आते हैं। इस बार की थीम के ज़रिए, यह पंडाल बंगाल की राजसी विरासत को एक नया रूप दे रहा है।
4. मिनटों रोड पूजा समिति
दिल्ली की सबसे पुरानी और सम्मानित दुर्गा पूजा समितियों में से एक है मिंटो रोड दुर्गा पूजा समिति, जो 1940 के दशक से लगातार भक्ति और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रही है। शहर के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित होने के कारण, यह पूजा हर साल दिल्ली के कोने-कोने से लोगों को खींच लाती है।इस साल भी 27 सितंबर से 2 अक्टूबर तक यहाँ भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह पंडाल अपनी सादगी, पारंपरिक रिवाजों और आत्मीय माहौल के लिए जाना जाता है। हर साल की तरह, इस बार भी पंडाल की थीम में समसामयिक विषय, पौराणिक कथाएँ या कोई कलात्मक संदेश देखने को मिलेगा — जो सोचने पर मजबूर करता है।

यह दुर्गा पूजा भक्ति, कला और संस्कृति का एक खूबसूरत संगम है। यहाँ की मूर्ति बेहद आकर्षक होती है, और हर शाम आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम दर्शकों को बांधे रखते हैं। खाने-पीने की स्टॉल्स भी खूब चहल-पहल जोड़ते हैं।राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के पास होने के चलते यहाँ पहुँचना भी बहुत आसान है। 80 सालों से चली आ रही ये परंपरा न सिर्फ धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक विविधता और एकता का भी मजबूत प्रतीक बन चुकी है।
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5. कश्मीरी गेट कालीबाड़ी
दिल्ली के सबसे पुराने दुर्गा पूजा स्थलों में से एक, कश्मीरी गेट कालीबाड़ी एक सदी से भी अधिक समय से मां दुर्गा की आराधना का केंद्र है। दिल्ली दुर्गा पूजा समिति के अनुसार, 1910 में शुरू हुई यह पूजा 114 सालों की गौरवशाली विरासत को समेटे हुए है।इस लंबे इतिहास के साथ भी यहाँ का उत्सव आज उतना ही उत्साहजनक और श्रद्धा से परिपूर्ण है। इस पूजा की पहचान इसके मौलिक रीति-रिवाजों और कलात्मक प्रस्तुतियों से है। प्रतिवर्ष यहाँ भरतनाट्यम, रबींद्र संगीत और बंगाली नाट्य मंचन जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, जो बंगाली संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत रखते हैं।
इस पूजा का मुख्य आकर्षण इसकी सहजता और महत्ता है — भव्य प्रदर्शन की बजाय, यहाँ भक्ति और परंपरा को प्राथमिकता दी जाती है। पूजा के दौरान यहाँ का वातावरण अत्यंत शुद्ध और आध्यात्मिक होता है, जो हर आने वाले को मंत्रमुग्ध कर देता है।राजधानी के अनेक पुराने बंगाली घरानों के लिए यह स्थान अपनेपन और जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक है, जो उन्हें अपनी मातृभूमि की याद दिलाता रहता है।
6. आराम बाग दुर्गा पूजा
दिल्ली के झंडेवालान इलाके में स्थित आरामबाग पूजा समिति (APS) इस साल अपनी 37वीं दुर्गा पूजा मना रही है। यह पूजा हर साल कुछ अलग करने के लिए जानी जाती है। इसकी सबसे खास बात है इसका “उद्देश्यपूर्ण पूजा” का तरीका, जिसमें हर साल कोई न कोई सामाजिक संदेश दिया जाता है।
27 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलने वाले इस उत्सव की थीम किसी जरूरी सामाजिक मुद्दे पर आधारित होती है — जैसे पर्यावरण, शिक्षा, या महिला सशक्तिकरण। यहाँ पूजा सिर्फ धार्मिक नहीं होती, बल्कि लोगों को जागरूक करने का भी काम करती हैआरामबाग की पूजा दिखाती है कि कैसे परंपरा और समाज की सोच साथ-साथ चल सकती हैं। यह पूजा सिर्फ माँ दुर्गा की भक्ति नहीं, बल्कि बेहतर समाज के लिए एक छोटा कदम भी है।
यह जगह RK आश्रम मेट्रो स्टेशन से बहुत नजदीक है, इसलिए यहां पहुंचना आसान है।

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