बिहार में हाल ही में सम्पन्न विधानसभा चुनावों में एनडीए ने अभूतपूर्व सफलता पाई है, जिसमें उसने 243 सदस्यों वाली विधानसभा में 202 सीटें जीती हैं। इसी के साथ जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख और वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निर्विरोध रूप से एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया है। यह उनके मुख्यमंत्री के रूप में 10वीं बार पद ग्रहण का मार्ग प्रशस्त करता है। 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में उनकी शपथ ग्रहण की योजना है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई गणमान्य नेतागण उपस्थित रहेंगे।
इस महत्वपूर्ण विकास की जानकारी देते हुए, एनडीए की पांच घटक पार्टियों के नवनिर्वाचित विधायकों की संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। भाजपा के सम्राट चौधरी को पार्टी के नेता और विजय सिन्हा को उप नेता का दायित्व सौंपा गया है। इस नई सरकार के गठन के साथ ही बिहार की जनता को विकास के एक नए अध्याय की उम्मीद है। नीतीश कुमार ने अपने डैमेज कंट्रोल की मिसाल देते हुए, गठबंधन की स्थिरता एवं आगामी कार्यकाल में राज्य के प्रगति हेतु संकल्प व्यक्त किया है।
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इस बार का चुनाव और सरकार गठन इसलिए भी खास है कि यह बिहार की राजनीति में निरंतरता, अनुभव और विकास के नए दौर की शुरुआत दिखाता है। एनडीए की जीत शादीशुदा गठबंधन की मजबूती और जनता के बीच सत्ता की स्वीकार्यता का प्रमाण है। नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर, जो विगत लगभग दो दशकों से लगातार मुख्यमंत्री पद पर काबिज हैं, इस चुनावी जीत के साथ और भी मजबूत हुआ है।
नीतीश कुमार की शपथ ग्रहण समारोह में कौन कौन होगा
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, और अन्य केंद्रीय एवं राज्य के मुख्यमंत्री उपस्थित रहेंगे। इसे बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है, जहाँ विकास, सुशासन और सामुदायिक समरसता का संदेश दिया जाएगा। एनडीए सरकार ने वादा किया है कि वह बिहार के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए पूरी लगन से काम करेगी और प्रदेश की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेगी।
यह नया अध्याय बिहार की राजनैतिक परिदृश्य में स्थिरता, विकास और नए अवसरों का संकेत देता है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार की जनता एक बार फिर प्रगति की राह पर अग्रसर होगी और राज्य की जनता के लिए बेहतर भविष्य के द्वार खुलेंगे।
