Faridabad में हाल ही में एक बड़े विस्फोटक जखीरे की बरामदगी ने पूरे उत्तर भारत में सनसनी फैला दी है। मीडिया में इसे ‘Faridabad RDX Case’ कहा जा रहा था, लेकिन पुलिस द्वारा साफ़ किया गया कि बरामद विस्फोटक RDX नहीं बल्कि अमोनियम नाइट्रेट है। नीचे इस ब्लॉग में पुरी जानकारी दे गयी है |
फरीदाबाद आरडीएक्स (RDX) केस: हकीकत और जांच
क्या है मामला?
- जम्मू-कश्मीर पुलिस और स्थानीय इंटेलिजेंस एजेंसियों की एक संयुक्त कार्रवाई में फरीदाबाद ज़िले के धौज गांव में एक घर से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, एक असॉल्ट राइफल, गोलियां, IED बनाने के सामान और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज बरामद की गईं।
- पहले मीडिया रिपोर्ट्स में इसे RDX बताया गया, लेकिन Faridabad Police Commissioner सतेंद्र कुमार ने पुष्टि की कि बरामद पदार्थ RDX नहीं, बल्कि अमोनियम नाइट्रेट है।
पुलिस ने किन्हें गिरफ्तार किया?
- मुख्य आरोपी के रूप में जम्मू-कश्मीर के डॉक्टर मुजम्मिल शकील और आदिल अहमद रदर को पुलिस ने हिरासत में लिया है।


- इन डॉक्टरों ने Al-Falah University, Faridabad के निवास पर यह विस्फोटक और हथियार छुपाए थे।
- पूछताछ और छापेमारी के दौरान एक AK-47 जैसी असॉल्ट राइफल, मैगजीन, कारतूस, टाइमर, रिमोट, वायरिंग और अन्य उपकरण बरामद हुए।
कैसे हुआ खुलासा
यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर पुलिस की खुफिया जानकारी पर की गई। यह सूचना गिरफ्तार डॉक्टर आदिल रदर से पूछताछ के दौरान मिली थी।
सूत्रों के अनुसार, आदिल रदर एक आतंकी नेटवर्क के लिए काम कर रहा था जो दिल्ली-एनसीआर में बड़ी साजिश रचने की योजना बना रहा था। फरीदाबाद पुलिस के अनुसार, दोनों घरों में विस्फोटक सामग्री सामान्य घरेलू सामान के बीच छिपाकर रखी गई थी ताकि किसी को शक न हो।
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जांच और सुरक्षा
- पुलिस और NIA जांच कर रही हैं कि इन विस्फोटकों का इस्तेमाल कहां और कैसे किया जाना था। जांच में सामने आया कि इतनी बड़ी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट कई high-intensity IEDs में इस्तेमाल हो सकता था।
- सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली-एनसीआर व आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है।
अफवाहों से बचें
- पुलिस ने स्पष्ट किया कि अफवाहों पर ध्यान न दें। बरामद विस्फोटक RDX नहीं है, हालांकि मामला गंभीर है और आतंक-सम्बंध की कड़ी खंगाली जा रही है।
निष्कर्ष
फरीदाबाद से इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे संभावित खतरे को समय रहते रोक लिया गया है। अभी तक की जांच में डॉक्टरों और आतंकवादी संगठनों की मिलीभगत का संदेह है, लेकिन सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।

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