दीवाली, रोशनी का त्योहार, खुशियों और उत्सव का प्रतीक है। लेकिन आतिशबाज़ी और धूमधाम के बाद इसका असर स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गहरा पड़ता है। त्योहार के अगले दिन वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में तेज़ी से वृद्धि होती है और हवा में धुआं व ज़हरीली गैसें भर जाती हैं।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
1. श्वसन संबंधी समस्याएँ (Respiratory Issues)
पटाखों से निकलने वाले ज़हरीले धुएं और सूक्ष्म कण (PM2.5 और PM10) श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं। इससे खांसी, गले में खराश, सीने में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ़ जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं।
अस्थमा, सीओपीडी (COPD) या ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोग, बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
N95/N99 मास्क पहनना और घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना राहत देता है।
2. आंखों में जलन (Eye Irritation)
धुएं और रासायनिक पदार्थों के संपर्क से आंखों में लालिमा, पानी आना और जलन होती है। ऐसे समय में घर के भीतर रहना और आंखों को साफ पानी से धोना लाभदायक रहता है।
3. हृदय संबंधी समस्याएँ (Cardiovascular Problems)
प्रदूषित हवा रक्त वाहिकाओं में सूजन पैदा करती है, जिससे हृदयाघात (Heart Attack), उच्च रक्तचाप (High BP) और स्ट्रोक का ख़तरा बढ़ जाता है।
लंबे समय तक संपर्क से हृदय संबंधी बीमारियाँ और गंभीर हो सकती हैं।
4. रोग-प्रतिरोधक क्षमता में कमी (Weakened Immune System)
पटाखों से निकलने वाले सीसा (Lead), कैडमियम (Cadmium) और अन्य भारी धातुएँ प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर करती हैं, जिससे संक्रमण, एलर्जी और त्वचा रोग (Eczema, Dermatitis) बढ़ सकते हैं।
5. कोविड-19 और अन्य फेफड़ों की बीमारियों पर असर
प्रदूषित हवा कोविड के बाद के फेफड़ों के रोगियों और अन्य श्वसन रोगियों के लिए खतरनाक होती है। इससे सांस लेने में कठिनाई और फेफड़ों की जकड़न बढ़ सकती है।
6. त्योहारी थकान (Festive Fatigue)
दीवाली के दौरान नींद की कमी, अधिक मिठाइयाँ, तली चीज़ें और मानसिक तनाव के कारण सिरदर्द, गैस, बदन दर्द, और थकान जैसी समस्याएँ आम होती हैं।

दीवाली के पर्यावरण पर प्रभाव
- वायु प्रदूषण: पटाखों से निकलने वाले धुएं से हवा में PM2.5 और PM10 की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है, जिससे घना स्मॉग बनता है और दृश्यता घट जाती है।
- ध्वनि प्रदूषण: तेज़ आवाज़ वाले पटाखे सुनने की क्षमता को नुकसान पहुँचाते हैं, नींद में खलल डालते हैं और जानवरों में घबराहट पैदा करते हैं।
- कचरा और रासायनिक अवशेष: पटाखों से निकला कचरा मिट्टी और पानी को दूषित करता है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ता है।
रोकथाम के उपाय
- दीवाली के बाद कुछ दिनों तक बाहर कम निकलें, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को बचाएँ।
- बाहर जाने पर N99 मास्क पहनें।
- ज्यादा पानी पिएँ और भारी भोजन या मिठाइयों से परहेज़ करें।
- कमरों का वेंटिलेशन सही रखें, एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।
- पर्याप्त आराम और नींद लें ताकि शरीर को पुनः ऊर्जा मिले।
- इको-फ्रेंडली दीवाली मनाएँ और पटाखों के उपयोग को सीमित करें।
निष्कर्ष
दीवाली का उद्देश्य प्रकाश, आनंद और सकारात्मकता फैलाना है। लेकिन इसका बाद का प्रदूषण हमारी सेहत और पर्यावरण दोनों पर असर डालता है।
यदि हम संवेदनशील और जिम्मेदार तरीके से त्योहार मनाएँ — जैसे कम पटाखे जलाना, पर्यावरण की रक्षा करना, और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना — तो हम सच में दीवाली की “रोशनी” को अर्थपूर्ण बना सकते हैं।

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