hasina two choices: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने मानवता विरोधी अपराधों में दोषी ठहराकर मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला उनके राजनीतिक करियर पर गहरी चोट करता है और उनकी पार्टी, आवामी लीग, के भविष्य को भी अस्थिर बना सकता है। अब उनके सामने दो ही रास्ते हैं — और दोनों ही बेहद मुश्किल।
विकल्प 1: कानूनी अपील और आत्मसमर्पण
ICT कानून की धारा 21 के तहत हसीना को सजा के 30 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार है। मगर इसके लिए उन्हें या तो आत्मसमर्पण करना होगा या गिरफ्तारी देनी होगी। अगर सुप्रीम कोर्ट अपील को खारिज कर देता है, तो वे फैसले की समीक्षा का अनुरोध भी कर सकती हैं। इस प्रक्रिया का नतीजा उनके राजनीतिक भाग्य को तय कर सकता है।
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विकल्प 2: राष्ट्रपति से दया याचिका
बांग्लादेश के संविधान के मुताबिक, राष्ट्रपति को सजा माफी या कमी करने की शक्ति प्राप्त है। शेख हसीना के लिए यह राजनीतिक और मानवीय स्तर पर आखिरी सहारा हो सकता है। अगर उनकी पार्टी और समर्थक पर्याप्त दबाव बना पाते हैं, तो यह रास्ता उन्हें राहत दे सकता है।
हसीना की प्रतिक्रिया और राजनीतिक असर
हसीना ने फैसले को “राजनीतिक साजिश” बताते हुए कहा कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अवसर नहीं मिला। उनकी गिरफ्तारी और सजा के बाद देश में राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है। ढाका और अन्य शहरों में हिंसा और विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आ रही हैं।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि बांग्लादेश की सत्ता संरचना और लोकतंत्र की दिशा तय करने वाला मोड़ भी है। अब देखना यह होगा कि शेख हसीना अपील की राह चुनती हैं या राष्ट्रपति की दया पर भरोसा करती हैं। दोनों ही रास्ते अनिश्चित और जोखिमभरे हैं, लेकिन उनका हर कदम आने वाले चुनावों और देश की स्थिरता को प्रभावित करेगा।

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