छठ पूजा, सूर्य भगवान और छठी मइया की उपासना का चार दिवसीय महापर्व है, जो शुद्धता, तप और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, नेपाल और प्रवासी भारतीय समुदायों में अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाता है । संवाद सहयोगी, भागलपुर। Chhath Puja Kab Hai, Chhath 2025, Chhath Puja 2025 सनातन धर्म के लिए कार्तिक मास पावन त्योहारों से भरा होता है। 21 अक्टूबर को कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की समाप्ति के उपरांत शुक्ल पक्ष आज यानी मंगलवार को सायंकाल से शुरू हो रहा है। इसके साथ ही घर-घर में लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा 2025 की तैयारी शुरू हो गई है। हिंदू पंचांगों में तिथियों की गणना में ऊपर-नीचे होने के चलते छठ Chhath 2025 मनाने में भी भ्रम या विभ्रांति की स्थिति बन जाती है।
छठ पूजा 2025 की तिथियाँ और मुहूर्त
| पर्व का दिन | तिथि | विशेष कार्य | समय (दिल्ली मुहूर्तानुसार) |
|---|---|---|---|
| नहाय-खाय | शनिवार, 25 अक्टूबर 2025 | स्नान और सात्विक भोजन | प्रातःकाल से |
| खरना | रविवार, 26 अक्टूबर 2025 | निर्जला उपवास और गुड़ की खीर का भोग | सूर्यास्त तक उपवास |
| संध्या अर्घ्य | सोमवार, 27 अक्टूबर 2025 | अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य | शाम 5:40 बजे |
| उषा अर्घ्य | मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025 | उगते सूर्य को अर्घ्य और व्रत समापन | सुबह 6:30 बजे तक |
छठ पूजा की दिनवार विधि
पहला दिन: नहाय-खाय (25 अक्टूबर 2025)
इस दिन व्रती पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करते हैं और घर की सफाई कर सात्विक भोजन बनाते हैं। भोजन में लौकी की सब्जी, चना दाल और चावल होता है। यह भोजन मिट्टी या पीतल के बर्तन में लकड़ी या उपले की आंच पर पकाया जाता है ।
दूसरा दिन: खरना (26 अक्टूबर 2025)
इस दिन व्रती सूर्योदय से चंद्रमा के उदय तक निर्जला उपवास रखते हैं। सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर, रोटी और केला छठी मइया को अर्पित कर स्वयं ग्रहण करते हैं। इसके बाद 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत प्रारंभ होता है ।
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (27 अक्टूबर 2025)
शाम को व्रती गंगाजल या किसी जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं। बांस की सूप में ठेकुआ, गन्ना, केला, हल्दी, नारियल, दीये और मौसमी फल सजाए जाते हैं। पारंपरिक गीतों और भजनों से वातावरण गूंज उठता है ।
चौथा दिन: उषा अर्घ्य (28 अक्टूबर 2025)
सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा होता है। भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं और अपने परिवार तथा समुदाय के लोगों में वितरण करते हैं। यह समारोह समाप्ति के साथ शुद्धता, आभार और नवजीवन का प्रतीक बन जाता है ।
छठ पूजा की कहानी और महत्व
कहा जाता है कि त्रेतायुग में भगवान राम और माता सीता ने अयोध्या लौटने के बाद कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव की आराधना की थी। इसी से यह परंपरा चली आ रही है। छठी मइया को सूर्य देव की बहन माना जाता है, और उन्हें संतान, स्वास्थ्य और समृद्धि की देवी के रूप में पूजा जाता है ।

यह पर्व प्रकृति के पंच तत्वों—जल, भूमि, वायु, अग्नि और आकाश—की उपासना का प्रतीक है। इसका उद्देश्य आत्मा की शुद्धि, कृतज्ञता और संतुलित जीवन के लिए प्रार्थना करना है
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छठ पूजा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
छठ पूजा सूर्य देव की जीवनदायी शक्ति और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का प्रतीक है। यह पर्व अनुशासन, तप, और पर्यावरण के प्रति संवेदना का उदाहरण है। यह भी माना जाता है कि छठी मइया, सूर्य देव की बहन हैं जो अपने उपासकों को संतान सुख, दीर्घायु और समृद्धि का वरदान देती हैं ।
इस पर्व का सामाजिक पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है—नदियों और तालाबों के किनारे एक साथ पूजा करने से समाज में एकता, प्रेम और सहयोग की भावना प्रबल होती है।
प्रमुख प्रसाद और पारंपरिक व्यंजन
छठ पूजा का मुख्य प्रसाद ठेकुआ होता है, जिसे गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बनाया जाता है। इसके साथ गन्ना, नारियल, केला और मौसमी फल भी पूजन सामग्री में शामिल रहते हैं। ये सभी प्राकृतिक तत्व पर्यावरणीय और कृषि परंपराओं से जुड़े हैं ।
निष्कर्ष
छठ पूजा 2025 का पर्व 25 से 28 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। यह चार दिनों की पूजा न केवल धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि यह मानव और प्रकृति के गहरे संबंध का उत्सव भी है। जब उगते सूर्य की किरणें जल में प्रतिबिंबित होती हैं, तब हर व्रती के मन में नई ऊर्जा, आस्था और प्रकाश का संचार होता है।
यह लोक आस्था का पर्व हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा में नहीं, बल्कि संयम, कृतज्ञता और जीवन में सामंजस्य स्थापित करने में है।
