दीपावली 2025
दीपावली, जिसे “रोशनी का त्योहार” कहा जाता है, भारत के सबसे पवित्र और हर्षोल्लास से मनाए जाने वाले पर्वों में से एक है। यह त्योहार न केवल घरों को रोशनी से जगमगाता है, बल्कि दिलों में भी प्रेम, ज्ञान और सद्भाव की लौ जलाता है। दीपावली से पहले घर की सफाई करना केवल रिवाज नहीं, बल्कि यह भीतर की नकारात्मकता को भी दूर करने का संदेश है। रंगोली, दीपक और सजावट से मन प्रसन्न होता है, वहीं ध्यान और प्रार्थना से आत्मा प्रकाशित होती है। दीपावली परंपरा, आध्यात्मिकता, रीति-रिवाज और पारिवारिक एकता का संगम है, जो हर समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है।
आध्यात्मिक संदेश: अंधकार से प्रकाश तक
दीपावली का असली अर्थ है अंधकार पर प्रकाश की विजय, बुराई पर अच्छाई की जीत और अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ना।
कथा के अनुसार, भगवान राम जब 14 साल का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे, तो नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। तभी से दीप जलाना इस पर्व की पहचान बन गया।
दीप जलाना हमें यह याद दिलाता है कि:
- मन के नकारात्मक विचारों को दूर करें।
- प्रेम और करुणा का प्रकाश फैलाएँ।
- आत्मा को शुद्ध और ज्ञानमय बनाएँ।
दीपावली के पाँच दिन
यह पर्व पाँच दिनों तक चलता है और हर दिन का अपना महत्व है:
1. धनतेरस (धनत्रयोदशी)- शनिवार, 18 अक्टूबर 2025
- भगवान धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी की पूजा करें
- सोना, चांदी, पीतल या बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है
- समृद्धि के स्वागत के लिए घरों को साफ और रोशन किया जाता है

2. नरक चतुर्दशी/काली चौदस – रविवार, 19 अक्टूबर 2025
- इसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है
- सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान (पवित्र तेल स्नान) किया जाता है ।
- दक्षिण भारत में यह मुख्य दीपावली दिवस है , जो भगवान कृष्ण की नरकासुर पर विजय का प्रतीक है।
3. लक्ष्मी पूजा (मुख्य दिवाली की रात) – सोमवार, 20 अक्टूबर 2025
- देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा की जाती है
- दीये अंधकार को दूर भगाने और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए जलाए जाते हैं
- परिवारों द्वारा घरों और व्यवसायों में लक्ष्मी-गणेश पूजा की जाती है
4. गोवर्धन पूजा/अन्नकूट- मंगलवार, 21 अक्टूबर 2025
- भक्तों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने वाले भगवान कृष्ण की पूजा
- मंदिरों में भव्य भोजन प्रसाद (अन्नकूट) और गोवर्धन अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है
5. भाई दूज/यम द्वितीया- बुधवार, 22 अक्टूबर 2025
खुशी के माहौल में उपहारों और मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है
भाई-बहन के बीच के बंधन का उत्सव
बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया और उनकी दीर्घायु की कामना की
शुभ मुहूर्त और पूजा
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त (Diwali 2025 Puja Shubh Mahurat)लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त – शाम 07 बजकर 08 मिनट से रात 08 बजकर 18 मिनट तक। प्रदोष काल – शाम 05 बजकर 46 मिनट से रात 08 बजकर 18 मिनट तक।
प्रसाद और मिठास
पूजा के बाद मिठाइयाँ और प्रसाद बांटे जाते हैं।
- लड्डू आनंद और एकता का प्रतीक हैं।
- खीर पवित्रता और प्रेम का प्रतीक है।
- सूखे मेवे वैभव और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं।
दिवाली 2025 लक्ष्मी-गणेश पूजन विधि और सामग्री
दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन विधिवत पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन, ज्ञान और सौभाग्य का वास होता है। दिवाली की पूजा दो मुख्य तत्वों पर आधारित है – पूजन सामग्री (Puja Samagri) और पूजा विधि (Puja Rituals)।
पूजन सामग्री (Diwali 2025 Puja Samagri)
लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए निम्न वस्तुओं की आवश्यकता होती है:
- भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की प्रतिमा
- लाल या पीला कपड़ा (चौकी सजाने के लिए)
- पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से बना)
- शुद्ध जल / गंगाजल
- हल्दी, कुमकुम और अक्षत (चावल)
- इत्र, फूल और फूलों की माला
- सुपारी, लौंग और इलायची
- धूपबत्ती और अगरबत्ती
- खील और बताशे
- गन्ना, सिंघाड़ा और मौसमी फल
- मिठाई (भोग के लिए)
- चांदी के सिक्के
- मिट्टी के दीपक, घी/तेल
- कलश, आम के पत्ते और नारियल
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पूजा विधि (Diwali 2025 Puja Rituals)
- सफाई और शुद्धिकरण
दिवाली वाले दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करें और स्नान करें। पूजा स्थल और पूरे घर में गंगाजल छिड़कें ताकि वातावरण पवित्र हो सके। - पूजा स्थल की तैयारी
एक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ। चौकी पर चावल से आसन बनाकर भगवान गणेश और महालक्ष्मी की प्रतिमा विराजमान करें। - दीप प्रज्वलन
चावल की ढेरी बनाकर उस पर घी का अखंड दीपक जलाएँ। यह दीपक माता लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक होता है। - कलश स्थापना
चौकी के दाईं ओर जल से भरा कलश स्थापित करें।- इस कलश में एक सिक्का, सुपारी और हल्दी डालें।
- इसके मुख पर आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें।
- कलश को तिलक लगाएँ और उसे पुष्प से सजाएँ।
- आराधना और अर्पण
भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी को फूल-माला अर्पित करें। माता को खील-बताशे, गन्ना, मिठाई और फल भोग स्वरूप अर्पित करें। - मंत्र-जप और आरती
वैदिक मंत्रों का जप करें और सबसे पहले भगवान गणेश की आरती, फिर माता लक्ष्मी की आरती करें। - क्षमा-प्रार्थना
पूजा के अंत में किए गए कार्यों में यदि कोई भूल हुई हो तो क्षमा याचना करें। यह पूजा की शुद्धता और विनम्रता का संकेत है। - दीप प्रज्वलन (दीपदान)
पूजा संपन्न होने के बाद घर के सभी दरवाजों, खिड़कियों, आँगन और छत पर दीपक प्रज्वलित करें। यह न केवल घर को रोशनी से भर देता है बल्कि प्रतीकात्मक रूप से अंधकार और नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है।
दिवाली पूजन का महत्व
इस पूरी विधि के साथ की गई पूजा से घर में सुख-शांति का वास होता है।
- लक्ष्मी पूजन से धन और समृद्धि आती है।
- गणेश पूजन से ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
- दीपदान से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है।
निष्कर्ष
दीपावली हमें यह सिखाती है कि:
- ज्ञान ही सच्चा प्रकाश है।
- अच्छाई ही सच्ची जीत है।
- और प्रेम ही सच्चा सुख है।
यह पर्व हमें प्रेरित करता है कि हम अच्छे कर्म करें, रिश्तों को सँभालें और ईश्वर से शांति व समृद्धि के आशीर्वाद प्राप्त करें।

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